Wednesday, March 9, 2011

पुतले में जान फूंककर....


पुतले में जान फूंककर,

सोचा था ख़ुदा ने
दुनिया की सबसे हसीं,

चीज़ बन गई...

उतरा ज़मी पर जब ये, 
मुजस्समा-ए-जानदार
जहां की हर शै, इससे डरकर
सहम गई...

दुनिया के तौर-ओ-तरीक़ों को सीखकर
इन पुललों की जान में रूह उतर गई...

देकर दिमाग़, नाम दिया था इंसान का
इन इंसानों के दिमाग़ में, कुराफ़ात भर गई...

बढ़ते क़दम आगे सिखाते गए पैतरे
दुनिया की पश-व-पेश में पड़, इनकी शान बड़ गई... 

जब देखा ख़ुदा ने इन्हें, तो हाल यूं हुआ
रूहवरों में जानवरों सी, फ़ितरत उतर गई...
  

5 comments:

  1. Aaj k daur k hisab se bahut hi sateek kavita likha hai... very nice pome...

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  2. जब देखा ख़ुदा ने इन्हें, तो हाल यूं हुआ
    रूहवरों में जानवरों सी, फ़ितरत उतर गई.
    सौ प्रतिशत सहमत
    जबरदस्त रचना
    मैं उन भाग्यशाली लोगों में से एक हूँ जिन्हें आप लोगों का साथ मिला आभार

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  3. उत्साहवर्धन के लिए आप सभी का धन्यवाद...

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