Saturday, April 23, 2011

मुसिबत का जनलोकपाल !!!

लोकपाल बिल की मांग पर अड़े अन्ना हज़ारे ने जब जंतर मंतर को चुना....तो साफ हो गया कि ये कोई छोटी मोटी जंग नहीं...जन सैलाब के आक्रोश की आंधी ने अन्ना के कंधों पर भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने का दारोमदार सौंप दिया... आवाम की हक़ की लड़ाई के लिए गांधी की छवी बनकर उभरे अन्ना हज़ारे के अनशन के बाद...राजनैतिक दलों में ज़लजला आ गया....5 दिन अन्ना बिन अन्न रहे...देश में मानों एक नई उर्जा का संचार कुछ ही घंटों में हो गया हो...पूरा देश अन्ना की मुहीम में एक जुट हो गया.... आखिरकार हज़ारे की ज़िद के सामने सरकार को नत मस्तक होना पड़ा...और सरकार ने जनलोकपाल बिल के पर हामी भर दी....
सरकार की रज़मंदी के बाद अन्ना ने अनशन त्यागा... इसके बाद चला जनलोकपाल बिल पर बैठकों का दौर...राजनेताओं की बयानबाज़ी और अरोप प्रत्यारोप के बावजूद पहली बैठक कामयाब रही...लेकिन अन्ना की मुहीम के दूसरे चरण की बैठक की तस्वीर तब बिल्कुल ही बदल गई...जब अमर सिंह की बोतल से सीडी नाम का जिन बाहर आया...सीडी का जिन बाहर आते ही बिल के विरोधियों में खलबली मच गई... कमेटी के सह अध्यक्ष शांति भूषण पर राजनेताओं की उंगलियां उठने लगीं...और यहीं से शुरू हुआ सिविल सोसाईटी की शांति भंग होने का सिलसिला...पहले सीडी चक्रव्यू और फिर ज़मीन के चक्कर में शांति भूषण को कमेटी में शामिल करने पर चारों तरफ़ से सवाल उठने लगे...यहां तक की सपा के पूर्व महासचिव अमर सिंह ने शांति भूषण पर सीडी मामले पर आरोप लगाते हुए उन्हें बदनाम मुन्नी के झंडू बाम जैसे अल्फ़ाज़ों से नवाज़ा.... मामले पर अमर वाणी यहीं नहीं थमी अमर ने शांति को उड़ी बाबा का ख़िताब देते हुए कहा शांति उनके दिए चार्टड प्लेन में उड़ी बाबा बन के दिल्ली से उड़ कर लखनऊ पहुंचे...
शांति भूषण पर हो रही बयानबाज़ी के बीच कमेटी के सदस्य जस्टिस संतोष हेगड़े भी लपेटे गए... कांग्रेस नेता दिग्वजय सिंह ने जस्टिस संतोष हेगड़े पर तरकश कसते हुए सवाल खड़े कर दिए...और कहा हेगड़े पहले देश के सबसे भ्रष्ट राज्य कर्नाटक का भ्राष्टाचार साफ़ करे... इन अरोप प्रत्यारोप के दौर में हेगड़े के इस्तीफ़े की ख़बरे आने लगी...
ख़ैर मुसिबत का लोकपाल अभी परेशानियों से गुज़र रहा था...तभी उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने भी बहती गंगा में हाथ धोने का फ़ैसला किया और जनलोकपाल के जनजाल में कूद पड़ी...माया भी लोकपाल की बिसात पर दलित फैक्टर की चाल चलने से बाज़ नहीं आई...दलित पत्ता फेकते हुए माया ने कमेटी में दलित सदस्य ना होने पर सवाल उठा दिया...
बहरहाल शतरंज की बिसात बना जनलोकपाल बिल पर...सभी राजनैतिक दल अपनी-अपनी चाल चलकर सिविल सोसाईटी के मोहरों को मात की जद्दोजहद कर रहे है... वहीं दूसरी तरफ कमेटी की सिविल सोसाईटी के नुमांईंदों में भी मनमुटाव की स्थिति पैदा हो गई है...एक दूसरे को मात देने की जुगत में लगे कमेटी और बाहर के लोगों ने इसे मुसिबत का लोकपाल बना दिया है...

Friday, April 8, 2011

हज़ारे नए युग के गांधी....


आज़ादी का वो दौर याद आ गया... जिसके किस्से आज तक सिर्फ़ किताबों में पढ़े थे... देश को आज़ाद कराने के लिए लाख़ो वीर जवानों ने अपने प्रणा की आहूति दी... लेकिन कुछ चुनिंदा नाम हमेशा हमारी जुबान पर रहते है... भगत सिंह, राजगुरू, सतगुरू”… आज़ादी मिलने के बाद देश गुलामी की ज़ंजीरों से तो आज़ाद हो गया... लेकिन फंस गया भ्रष्टाचार के घिनौने दलदल में... लेकिन भारत माता की गोद में आज भी गांधी जैसे उसके होनहार सपूत मौजूद है... जो अपनी मां की रक्षा के लिए बलिदान दे सकते है... और इसकी जीती जागती मिसाल बनकर उभरे है अन्ना हज़ारे... जो देश को भ्रष्टाचार के घिनौने दलदल से मुक्त करने के लिए सरकार से जन लोकपाल बिल पास करने की जिद पर अड़े हैं...  अन्ना की ये ज़िद ही देश में इमान की क्रांती को जन्म दे सकती है...
इस लड़ाई में पूरा देश उनके साथ है... इंसाफ़ की आंधी में जन सैलाब का रूख लगातार अन्ना हज़ारे के मंच की तरफ़ बढ़ रहा है... भ्रष्टाचार से मुक्ति पाने का नारा लेकर देश का हर तबक़ा दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंच रहा है... हज़ारे की भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ छेड़ी गई जंग में... देश के ख़ास-व-आम अन्ना की आवाज़ बन रहे है... हर तरफ़ से सिर्फ एक ही नारा बुलंद हो रहा है... अन्ना हज़ारे आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं... अन्ना के समर्थन के लिए कई फिल्मी हस्तियां, सामजसेवी, धर्मगुरू, और आम आदमी का जमावड़ा जंतर मंतर पर लगा है...
देश के आंदोलन और महात्मा गांधी के किस्से किताबों में पढ़ने वाले बच्चे भी हज़ारे की उंगली पकड़े के लिए आंदोलन में शामिल हो रहे है... अन्ना के अंदर लोगों को गांधी जी की छवी नज़र आ रही है... हैरत तो ये है की इन मासूम को भ्रष्टाचार का सही मानों में मतलब भी नही पता है... लेकिन भविष्य में देश की बागदौड़ संभालने वाले बच्चे अन्ना का समर्थन करने पहुंचे...
अन्ना के अनशन से सरकार के खैमें में खलबली मच गई... सरकार ने अपनी तरफ़ से मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल को अन्ना को समझाने के लिए भेजा... लेकिन मसले का कोई हल नही निकला अन्ना की 5 मांगों में से सरकार ने दो मुद्दे नोटिफिकेशन और समीति के अध्यक्ष पद पर सहमति नहीं जताई... तो अन्ना भी अड़े रहे... सरकार को नाको चने चबवाने वाले अन्ना के आमरण अनशन से सरकार में बैठकों का दौर जारी है... और इस सिलसिले में  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राष्ट्रपति प्रतिभा  देवी सिंह पाटिल से भी मिले... लेकिन ज़िद पर अड़े हज़ारे किसी भी कीमत पर सरकार के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं... उनका कहना है की सरकार का दिमाग ठिकाने पर आएगा... बहरहाल जंतर मंतर से उठी अंदोलन की आग की लपटों ने पूरे देश को जकड़ लिया है... हाज़ारों आंदोलन का गवाह बना जंतर मंतर तहरीर चौक की शक्ल इख़तियार कर चुका... और अब ये अन्ना के देश व्यापी आंदोलन का गवाह बनने जा रहा है...