महिला आरक्षण पर राजनीति


महिला आरक्षण बिल...
हमारे देश में महिलाओं को देवियों का दर्जा दिया जाता है....और अगर यही देवियां जब अपने हक़ की बात करती है, कुछ करने की चाह रखती है तो समाज का पुरूष तिलमिला जाता है...और ये कोई किताबी बात नही है ऐसा ही अभी हाल में हुआ है...
महिला आरक्षण बिल...इस पुरूष प्रधान समाज के गले की हड्डी बना है ....ऐसा पहली बार नही हुआ है कि महिला आरक्षण बिल पर बवाल नही हुआ...कई बार अपनी गर्म जोशी दिखाते हुए ये बिल सत्ता के गलियारों में तो थिरका लेकिन किसी मजबूर अबला नारी की तरह ठंडे बस्ते में चला गया...लेकिन एक बार फ़िर महिला आरक्षण बिल बरसो बाद निकल कर एक नया इतिहास रचने आ गया....इस बार यह विधेयक सत्ता के गलियारों में सिर्फ़ थिरका नही बल्कि तांडव मचा कर अपनी जीत करवा ही गया...लेकिन अभी भी महिला बिल अपनी एक जगह की तलाश में है क्योंकि इसे सिर्फ़ राज्यसभा में ही पास किया गया है...वो भी इतनी मुश्किलों के बावजूद...आज भी याद है वो दिन जब लोक तंत्र के मंदिर में महिला आरक्षण बिल की धज्जियां उड़ाई गई थी...वैसे ये कोई नई बात नही है...इस तरह की घटनाए हर रोज़ होती है...कि महिलाओं पर अत्याचार, कभी इमोशनल तो कभी प्रेशराईज़ किए जाते है... लेकिन ये आम बात है...और तो और जिनके हाथ में सत्ता की कमान है...जनता के हित में दम्भ भरने वाले और सत्ता की बोली बोलने वाले इस बिल पर ऐसी टिप्पणीयां करते है कि सुनने वाला भी हाय तौबा मचा दे...इस बिल के विरोध में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव का कहना है की यह बिल अगर पास हो गया तो वो दिन दूर नही की संसद में खूब सिटियां बजेंगी...इस कमेंट से तो ऐसा लगता है कि मुलायम सिंह यादव अपने ज़ामाने में बहुत बड़े सीटी बाज़ रहे होगे...सब तो ठीक है अफ़सोस तब हुआ जब बिल में भी कोटा इन कोटा की बात होने लगी...इस बवाल से अभी हम उभरे भी नही थे कि शिया धर्म गुरू कल्बे जव्वाद ने भी बहती गंगा में हाथ धोते हुए यह टिप्पणी दे डाली की महिलाए नेता न बने बल्कि नेता पैदा करें...उनके लबे मुबारक से ये बात का निकला की पूरे देश में बिल पर एक और नया तमाशा बनना...हांलाकि इस बात की उन्होने एक न्यूज़ चैनल पर सफ़ाई भी दी लेकिन कहते हैं न कमान से निकला तीर और ज़ुबान से निकली बात कभी वापस नही होती...इस पूरे मुद्दे पर आख़िर में फ़्रिर वही महिलाओं की दुख भरी गथा निकल कर सामने आती है....फ़िर वही रोना.... राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती है दुख तो अपना सथी है...

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