बहादुरी के साथ कुछ सवाल भी जरूरी हैं


कैप्टन स्मित मच्छार ने संकट की घड़ी में जिस साहस और सूझबूझ के साथ विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बचाने में भूमिका निभाई, उसकी सराहना होनी चाहिए। लेकिन किसी घटना की जांच में सवाल पूछना भी उतना ही जरूरी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी वीडियो कॉल अस्पताल में इलाज के दौरान हुई और बातचीत करीब 9-10 मिनट की थी। वीडियो में उनके चेहरे और सिर पर चोटें तथा नाक में मेडिकल ट्यूब दिखाई दे रही थी। ऐसे में सवाल यह है कि उनकी उस समय की वास्तविक मेडिकल स्थिति क्या थी और वह किस तरह का मेडिकल सपोर्ट ले रहे थे? इसका जवाब डॉक्टरों और मेडिकल रिकॉर्ड से स्पष्ट होना चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि हमले के दौरान वह हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। यह उनकी व्यक्तिगत आस्था है और उसका सम्मान किया जाना चाहिए। लेकिन घटना की पूरी टाइमलाइन और मेडिकल स्थिति को तथ्यों के आधार पर समझना भी जरूरी है।

दूसरा बड़ा सवाल है, कॉकपिट तक चाकू पहुंचा कैसे? एयरपोर्ट सिक्योरिटी, क्रू स्क्रीनिंग और कॉकपिट एक्सेस जैसे सुरक्षा प्रोटोकॉल के बावजूद हथियार अंदर पहुंचने की पूरी प्रक्रिया क्या थी? इसका जवाब आधिकारिक जांच से मिलना चाहिए।

और अब उन लोगों से भी एक सवाल, जो इस घटना के बाद कह रहे हैं कि मुसलमानों को कमर्शियल पायलट नहीं होना चाहिए।

अगर किसी एक व्यक्ति की हरकत के आधार पर पूरे धर्म के लोगों को विमान उड़ाने से रोकने की बात होगी, तो फिर उसी तर्क से यह सवाल भी पूछा जा सकता है कि जिन दे


शों से विमानन ईंधन या दूसरी जरूरी चीजें आती हैं, क्या उनके धर्म के आधार पर उन चीजों का इस्तेमाल भी बंद कर दिया जाए?

जाहिर है, यह तर्कसंगत नहीं है।

सुरक्षा का आधार धर्म नहीं, बल्कि स्क्रीनिंग, ट्रेनिंग, लाइसेंस, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और जवाबदेही होनी चाहिए।

इसलिए कैप्टन स्मित की बहादुरी को सलाम, लेकिन घटना से जुड़े हर सवाल का जवाब भी जरूरी है।

न बहादुरी पर सवाल, न सवाल पूछने पर रोक जनता को चाहिए पूरी क्रोनोलॉजी और पुख्ता तथ्य।

__Marxia Jafar, Journalist 

Comments

Popular posts from this blog

37 Days of the Cockroach Janata Party Movement: Democracy Won, but It Also Left Some Questions Behind Democracy's Victory and the Power of Youth

न इधर उधर की तू बात कर...

What We Do???